ग्रीष्मकालीन जल संकट से निपटने की तैयारी, तीसरी फसल पर रोक लगाने की मांग

*ग्रीष्मकालीन जल संकट से निपटने की तैयारी, तीसरी फसल पर रोक लगाने की मांग*

नपा अध्यक्ष बसंती बाई यादव ने कलेक्टर जयति सिंह को पत्र लिखकर पेयजल के लिए आरक्षित जल सुरक्षित रखने का किया अनुरोध

*सेंधवा* । क्षेत्र में इस वर्ष कम वर्षा होने के कारण आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगरवासियों को गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके, इसके लिए नगर पालिका अध्यक्ष बसंती बाई यादव ने जिला कलेक्टर जयति सिंह को पत्र लिखकर रलावती बांध से पेयजल आपूर्ति के लिए आरक्षित जल को सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने नदी किनारे के किसानों द्वारा रबी और खरीफ की फसल लेने के बाद जनवरी माह में तीसरी फसल लगाने पर रोक लगाने तथा दिसंबर माह के अंत तक रलावती बांध से सिंचाई के लिए संचालित नहरों को बंद करवाने का अनुरोध किया है।

भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में औसत वर्षा में लगभग 22 प्रतिशत की कमी के चलते आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाना जरूरी है, ताकि गर्मी के दिनों में सेंधवा नगर के नागरिकों को पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़े।

पेयजल के लिए 2 एमसीएम जल आरक्षित

नगर पालिका अध्यक्ष बसंती बाई यादव ने कलेक्टर को लिखे पत्र में बताया कि सेंधवा नगर की पेयजल आपूर्ति के लिए प्रतिवर्ष जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित रलावती तालाब से ग्रीष्मकाल हेतु 1.11 एमसीएम जल आरक्षित करवाया जाता है। आगामी ग्रीष्मकाल में संभावित जल संकट की गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष पेयजल के लिए 2 एमसीएम जल आरक्षित करवाया गया है।

उन्होंने बताया कि रलावती बांध से नगर पालिका के बैराज तक पेयजल के लिए आरक्षित जल को नदी मार्ग से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान नदी किनारे के किसानों द्वारा सिंचाई के लिए पानी का उपयोग कर लिए जाने से नगर तक आरक्षित जल की पर्याप्त मात्रा में पहुंचने में परेशानी उत्पन्न हो सकती है। इससे गर्मी के मौसम में नगर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

तीसरी फसल पर रोक और सिंचाई की नहरें बंद करने की मांग

नपा अध्यक्ष ने पत्र में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पेयजल के लिए आरक्षित पानी को सुरक्षित रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। किसान खरीफ और रबी की फसल लेने के बाद जनवरी माह में तीसरी फसल की बुवाई करते हैं। इस फसल के लिए नदी से बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग होने की संभावना रहती है। ऐसे में आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट से बचने के लिए जनवरी माह में तीसरी फसल की बुवाई पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने दिसंबर माह के अंत तक रलावती बांध से सिंचाई के लिए संचालित नहरों को बंद करवाने की आवश्यकता भी बताई, ताकि पेयजल के लिए आरक्षित जल का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके और नगर पालिका के बैराज तक पर्याप्त पानी पहुंच सके।

संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध

बसंती बाई यादव ने जिला कलेक्टर से अनुरोध किया है कि संभावित ग्रीष्मकालीन जल संकट को ध्यान में रखते हुए अनुविभागीय दंडाधिकारी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग बड़वानी तथा अनुविभागीय अधिकारी कृषि सेंधवा को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। संबंधित विभागों के समन्वय से समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने पर पेयजल के लिए आरक्षित जल को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि नगरवासियों को गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए संभावित संकट को गंभीरता से लेते हुए अभी से आवश्यक व्यवस्था करना जरूरी है, जिससे बाद में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों से बचा जा सके।

पत्र सौंपते समय ये रहे उपस्थित

जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर पेयजल संकट से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध करने के दौरान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अरुण चौधरी, भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल, प्रकाश निकुम तथा विक्की वर्मा उपस्थित रहे।

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