शारदीय नवरात्र🌹🔱अध्यात्म शास्त्र एवं ज्ञान)
नवरात्र विशेष🙏🌷११ अक्टूबर २०२६ रविवार से
🔱👉 *सनातन परंपरा/संस्कृति में नवरात्र काल को विशेष पवित्र समय माना गया है। यह समय एक विशेष ऊर्जा का समय होता है। इस समय की हुई साधनाओं से आप आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
🔥👉 *पवित्र नवरात्र के समय में सौरमंडल में ग्रह- नक्षत्र- निहारिकाओं कें कुछ विशेष संयोग बनतें है। और इस समय के दौरान किए गए जप- तप- साधना-अनुष्ठान- व्रत- उपवास- दान- पुण्य इत्यादि के कई गुना शुभ व सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होतें है।
🔱👉 *इस समय के दौरान आपका आहार- विहार जितना पवित्र होगा उतना ही आपका मन भी पवित्र होता जाएगा और आपके द्वारा किए हुए जप- तप- अनुष्ठान का आपको कई हजार गुना शुभ फल प्राप्त होंगे,आपकी साधनाएं सफल व सिद्ध होगी।
🔥👉 *नवरात्र के दिनों में शुद्धता व पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। काम क्रोध, मद, लोभ, अहंकार जैसे विजातीय तत्वों से दूर है।
🔱👉 *नवरात्रि के दिनों में सात्विक भोजन व पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। कम बोले, मौन व्रत का पालन ज्यादा से ज्यादा करें, अनर्गल वार्तालाप से बचें/जप व स्वाध्याय में ज्यादा समय बिताएं।
🔥👉 *अगर आप नवरात्र का व्रत रखते हैं तो बहुत अच्छी बात है, आप नियम के साथ व्रत रखिए। अगर आप व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो आप विधिवत पूजा भी कर सकते हैं। अगर आपका स्वास्थ्य आपका साथ दे रहा है तभी आप व्रत रखें/ लेकिन इस समय केवल सात्विक व घर का भोजन ही करें।
🔱👉 *नवरात्री में देवी दुर्गा को तुलसी या दूर्वा घास अर्पित न करें इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए।
🔥👉 *नवरात्र पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले रोली या कुमकुम से पूजन स्थल के दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक बनाया जाना शुभ रहता है।
🔱👉 *नवरात्र के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पाठ के साथ कवच, कीलक अर्गला का पाठ भी करना चाहिए। अगर 1 से 13 अध्याय का पाठ हर दिन नहीं पाए तो हर दिन एक-एक चरित्र का पाठ करें। सप्तशती को 3 चरित्र में बांटा गया है प्रथम, मध्यमा और उत्तम।
🔥👉 *नवरात्र के दिनों में हो सके तो प्रतिदिन जोत लें या छोटा हवन करें। क्योंकि यह मां को अति प्रिय है।
🔱👉 *घर में कुछ उपलब्ध वस्तुओं से भी हवन किया जा सकता है जैसे-: लौंग , इलायची, किसमिस, काजू, छुआरा, नारीयल का बुरादा ( चिटकी), जौ, इत्यादि जो भी उपलब्ध हो।
🔥👉 *हवन या ज्योत में गाय का शुद्ध देसी घी का ही प्रयोग करें/शुद्ध तिल्ली का तेल भी काम में ले सकते है।
🔱👉 *नवरात्र में नौ कन्याओं को भोजन कराएं। नौ कन्याओं को नवदुर्गा मानकर पूजन करें। बेहतर होगा कि नियमित एक कन्या को भोजन कराएं और अंतिम दिन भोजन के बाद उस कन्या को वस्त्र, फल, श्रृंगार सामग्री देकर विदा करें।
🔥👉 *नवरात्र के भोग में मां दुर्गा को रोजाना फल/ फूलअर्पित करें। इन फलों को भोग लगाने के बाद आप परिवार के लोग ग्रहण कर सकते हैं।।
👉नवरात्रि में अपने क्षेत्र के विद्वान ब्राह्मण से दुर्गा सप्तशती के पाठ, पूजन, हवन , श्री सूक्त के पाठ ,रामचरित्र मानस,राम रक्षा स्तोत्र के पाठ करवाए । विधि विधान से घट स्थापना एवं हवन करवाए। मंत्र जाप एवं साधना किसी तपस्वी संत महात्मा ,या शंकराचार्य जी की परंपरा द्वारा प्राप्त हो तो ही करे ।
👉🏻सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी साधना, मंत्र जाप,टोना – टोटका न करे ।साधना गुरु परम्परा एवं किसी योग्य साधक के दिशा निर्देशन में ही करे।सबसे सरल अनुभूत चमत्कारी प्रयोग है श्री रामरक्षा स्तोत्र ।इस स्तोत्र के अधिक से अधिक पाठ कर लाभान्वित हो। अगर आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहते है और संस्कृत नहीं आती है, तब आप हिंदी में भी दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते है।
माताजी की पूजा में रक्त चंदन,बिल्वपत्र,कनेर गुलाब गुड़हल के फूलों का उपयोग करे ।एवं शुद्ध हल्दी से निर्मित कंकु का ही प्रयोग करे।
🌹🌹 *नवरात्रि का समय एक ऐसी दिव्य ऊर्जा का काल है जिसमें आप अपने ईष्ट की साधना करके अपने अंदर दिव्यता और सकारात्मकता ला सकते हैं।।
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*जय माई की *🙏🌹
*आपका सनातनी भाई *
*पं कपिल शर्मा (काशी महाराज)*