देवोत्थान एकादशी में “त्रिस्पर्शा” का दुर्लभ संयोग-काशी महाराज

….हेमन्त गर्ग……..🪷 देवउठनी एकादशी 🪷
*02 नवंबर 2025 रविवार*

*देवोत्थान एकादशी में “त्रिस्पर्शा” का दुर्लभ संयोग-*

दिनांक 2-11-2025 (रविवार) विक्रम संवत 2082 की कार्तिक शुक्ल एकादशी

कृपया घर के सभी सदस्य इस एकादशी का व्रत अवश्य करें। जीवन मे ऐसे अवसर बार बार नही मिलते।

पद्मपुराण के अनुसार यदि सूर्योदय के बाद थोड़ी सी एकादशी, मध्य में पूरी द्वादशी एवं अंत मे किंचित मात्र भी त्रियोदशी हो, तो वह “त्रिस्पर्शा एकादशी” कहलाती है।

यदि एक त्रिस्पर्शा एकादशी को उपवास कर लिया जाए तो एक सहस्त्र एकादशी व्रतों का फल (अर्थात पूरे जीवन भर एकादशी व्रत करने का फल) प्राप्त होता है।

“त्रिस्पर्शा एकादशी” का पारण त्रियोदशी में करने पर 100 यज्ञों का फल प्राप्त होता है।

प्रयाग में मृत्यु होने से तथा द्वारका में श्री कृष्ण के निकट गोमती में स्नान करने से जो शाश्वत मोक्ष प्राप्त होता है, वह “त्रिस्पर्शा एकादशी” का उपवास कर के घर पर ही प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा पद्मपुराण के उत्तराखण्ड में “त्रिस्पर्शा एकादशी” की महिमा में वर्णन है। इसलिए यदि मुझसे पूछेंगे एकादशी व्रत कब रखना है तो में तो परसों की ही कहूंगा..कुछ विद्वान ब्राह्मण कल की सलाह दे रहे हैं तो जो कल रखना चाहें वो कल रख सकते हैं..

पंचांग के अनुसार देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी व्रत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की लंबी नींद के बाद जगते हैं। इस दिन से सभी शुभ- मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं।

देवउठनी एकादशी के दिन “तुलसी विवाह” भी किया जाता है। अतः यह तुलसी विवाह 02 नवंबर 2025, रविवार देवउठनी एकादशी के दिन किया जाएगा।

*🔸देवउठनी एकादशी व्रत-:*
* इस बार एकादशी व्रत/ तुलसी जी का विवाह 02 नवंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा।

*🔸व्रत का पारण-:*
* एकादशी का पारण अगले दिन 03 नवंबर, सोमवार सुबह सूर्योदय के उपरांत किया जा सकेगा।

*🔸देवउठनी एकादशी-:*

* इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान वगैरा से निवृत हो जाए। और साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करें काले- नीले कपड़ों से परहेज करें।

* भगवान श्रीहरि विष्णु जी को सुबह सबसे पहले तुलसी दल अर्पित करें, और भगवान सुंदर व पवित्र भाव के साथ व लोकगीत/ श्लोक, प्रार्थना व मंत्रों के साथ उठाएं और उनसे जगत के कल्याण की कामना करें। आप यह मंत्र भी पूरे भाव के साथ उच्चारित कर सकते हैं-:

*”उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज,*
*उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलं कुरु।”*

*🔸एकादशी व्रत के सामान्य नियम-:*

▪️जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें दशमी तिथि से ही व्रत की तैयारी करनी चाहिए। उन्हें दशमी तिथि को भी सात्विक व सुपाच्य भोजन लेना चाहिए।

▪️एकादशी व्रत के दिन किसी भी तरह का अन्न (अनाज) नहीं खाया जाता। इस दिन चावल खाना व खिलाना बिल्कुल वर्जित है।

▪️एकादशी व्रत के दिन ज्यादा से ज्यादा मौन व्रत का पालन करें। भगवान के मंत्रों का जाप , श्री गोपाल सहस्त्रनाम, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, श्री रामचरित्र मानस भागवत गीता आदि का पठन व श्रवण करना चाहिए।

▪️एकादशी व्रत के दिन फल , दूध इत्यादि भगवान को भोग लगाने के उपरांत ग्रहण किया जा सकता हैं।

▪️भगवान श्री हरि विष्णु या भगवान श्री हरि के अवतार श्री राम, श्री कृष्ण के भोग में तुलसी दल का उपयोग जरूर करना चाहिए। बिना तुलसी दल के भोग स्वीकार नहीं होता।

▪️एकादशी के दूसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है, व्रत पारण के दिन भगवान को सात्विक भोजन का भोग लगाकर पारण करें और इस दिन अपनी श्रद्धा अनुसार दान- पुण्य करें। उसके उपरांत स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।

*एकादशी तिथि के अवसर पर की गई गौसेवा का फल अक्षय होता है। गौमाता की सेवा से ही गोपाल प्रसन्न होते हैं एवं पितृ देव तृप्त होते हैं। कल “देवप्रबोधिनी” (देवउठनी एकादशी) एवं “तुलसी विवाह” के शुभअवसर पर यथा संभव गौसेवा करके पुण्यलाभ अर्जित करें.