….हेमन्त गर्ग…….आदिवासी परंपरा का वन भाजी उत्सव, स्वास्थ्य परीक्षण एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग मोरकट्टा में संपन्न
नर्मदा के किनारे स्थित मोरकट्टा गांव के जंगलों में होने वाली वनभजी लेकर लगभग 100 महिलाओं ने अपने ज्ञान को एक दूसरे से और पूरे गांव के साथ साझा किया। कार्यक्रम आदिवासीयों की आराध्य देवमोगरा माता, गांव के बाप देव, रानी काजल माता, तोरणमाल के आदिवासी देवता के पूजन के साथ प्रारंभ हुआ।
गांव की महिलाएं लगभग 20 वनभाजियों को लेकर के वनभाजी उत्सव में प्रतिभागी बनी। कई युवा महिलाएं जो 5-10 भाजियों के बारे में जानती थी, वह 20 भाजियों का ज्ञान लेकर के वनभजी उत्सव से लौटीं। भजियों में प्रमुख रूप से झरकली, कटले की भाजी, भाजंन भाजी, राजगीर की भाजी, आमली की भाजी, वछाती की भाजी, भेंड़ की भाजी, पोआडे की भाजी, कुंजरा की भाजी, खाटफूलिया की भाजी, ठमरिया की भाजी आदि थी। गांव के लगभग 200 लोगों ने वन भाजी उत्सव में सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन गांव स्कूल, स्कूल फलिया में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के मार्गदर्शक प्रोफेसर डॉ सौरभ मारू, एन. एम. आई. एम. एस. विश्वविद्यालय, शिरपुर ने वनभाजियों के महत्व, इसके पर्यावरण, स्वास्थ्य, आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक पक्ष के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आदिवासी परंपराएं विश्व को मार्गदर्शन देने वाली है। इन परंपराओं से ही पृथ्वी पर जीवन और विश्व सभ्यता-संस्कृति का सातत्य संभव है।
गांव के वारती श्री सरजन, जो बड़वाई भी करते हैं 17 भाजियों को लेकर आए और सभी को एक-एक करके सभी भाजियों के गुण-दोष और बनाने के तरीकों के बारे में बताया। गांव पटेल श्री मूल्या जी ने आदिवासी परंपराओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। गांव की वरिष्ठ महिलाओं ने वनवासियों और उसको समझ करके एकत्रित करने के विषय में विस्तृत जानकारी दी। ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ और उसे आधार पर महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग में सिकल सेल ग्रसित बहुत से लोग पाए गए।
गांव के लोगों को पेसा एक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।सामुदायिक वन अधिकार के बारे में और सरकार द्वारा व
यह क्यों बनाया गया, उसके देश के अलग-अलग आदिवासी क्षेत्रों में कितने अच्छे प्रभाव हुए, आदिवासियों का जीवन आसान हुआ, आय में वृद्धि हुई आदि विषयों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
गांव सरपंच श्री सीताराम जी निंगवाल, गांव पटेल श्री मूल्या जी पटेल, उप-सरपंच श्री वेरसिंग जी, पंच श्री सयदान जी, पंच श्री सीताराम जमरे ने पूरे कार्यक्रम के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई। पूरे कार्यक्रम का नियोजन डॉक्टर अप्पू बामनिया, डॉक्टर रायसिंग सोलंकी, श्री सतीश भूरिया, पेसा ब्लाक कोऑर्डिनेटर ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में श्री प्रीतम बडोले, जिला समन्वयक, पैसा एक्ट,भूर सिंह वास्कले, पेसा मोबलाईजर, पंचायत सचिव मोरकट्टा, गांव चौकीदार, बनिया महाराज, महादेव जी का सराहनीय सहयोग रहा। डॉ राय सिंह, डॉ अप्पू डॉ दीपक जमरे ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग की। सुनील जी, विकास जी का सिकल सेल स्क्रीनिंग में सहयोग रहा।