…. हेमन्त गर्ग……….नगर के कृषि उपज मंडी स्थित शेड में गौरीशंकर कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में श्री शिवमहापुराण कथा प्रारंभ शनिवार को हुआ। कथा के पहले श्री सत्यनारायण मंदिर से शोभायात्रा गाजे बाजे के साथ प्रारंभ हुआ।
भजनों, गरबा पर झूमे श्रद्धालु
शोभायात्रा, कलशयात्रा सत्यनारायण मंदिर से प्रारंभ हुई जो श्याम बाजार, राम बाजार, किला परिसर होते हुए कथा स्थल पहुंची। भजनों, गरबा के साथ श्रद्धालु खूब झूमे। मंदिर परिसर में अग्रवाल समाज ने स्वागत किया। सत्यनारायण मंदिर में विधिवत श्री शिवमहापुराण का पूजन किया गया। श्रद्धालु सिर पर पुराण की प्रति लेकर शोभायात्रा में चले। विशेष रथ पर कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज विराजित हुए। श्याम बाजार में अनेक परिवारों ने स्वागत किया। राम बाजार में पालीवाल समाज ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
भक्त को यमलोक में नहीं रहने देते है शिव
जो भगवान शिव की महापुराण को सुन लेता है उसे शिव यमलोक में नहीं रहने देते है। भगवान दयालु है। शिव की भक्ति से महापापों का भी नाश हो जाता है। शिवमहापुराण कथा में भगवान शिव ने कहा है कि
मेरा ध्यान करते हुए कोई भी शरीर त्यागता है तो में उसका कल्याण करता हु। भगवान को कपट छल छिद्र पसंद नहीं है। वह कहते है मुझे निर्मल मन अच्छा लगता है। भगवान की भक्ति से ही मन निर्मल होता है। जब सच्चे मन ने भगवान की भक्ति होगी।
विपरीत समय में धैर्य, मित्र की परीक्षा होती है
कथा वाचक ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी। इसका अर्थ यह है कि धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी (नारी)—इन चारों की असली परीक्षा विपत्ति या संकट के समय ही होती है। विपरीत परिस्थिति में धैर्य होना चाहिए, मित्र की असली परीक्षा बुरे समय में होती है बुरे समय में कोई मुंह मोड़ ले तो वह सच्चा मित्र नहीं हो सकता।
बुरे समय में धर्म प्राणी की रक्षा करता है
धर्म को जो त्याग देते है वह मूर्ख है यदि सुख शांति चाहिए तो धर्म का आश्रय लो। धर्म प्राणी की वहां रक्षा करता है जहां कोई रक्षा नहीं करता है। हर पुराण, हर शास्त्र कहता है कि पाप मत करो फिर भी व्यक्ति पाप कर रहा है इसलिए धर्म के आचरण का महत्व है। शिव पुराण सुनने, पढ़ने से मने धर्म का जागरण होता है।