*🪔धन त्रयोदशी*🪔
*दिनांक 2 नवंबर 2021 मंगलवार*
शिवरात्रि ,भौम प्रदोष ,यमदीप दान,धन्वंतरि जन्मोत्सव*
*शुभ पूजन मुहूर्त*
सुबह 10:46 से 1:34 बजे तक
शाम 7:23 से 8:59 बजे तक
*अभिजीत मुहूर्त*
सुबह 11:48 से 12:33 बजे तक
*कुम्भ लग्न*-दोपहर 1:45 बजे से 3:18 तक
*वृषभ लग्न*- शाम 6:34 से 8:33 बजे तक
*होरा मुहूर्त*
*शुक्र बुध* सुबह 8:26 से 10:18 तक
*चंद्रमा* सुबह 10:18 से 11:14 बजे तक
*गुरु*-दोपहर 12:10 से 1:06 बजे तक
*🪔रूप चतुर्दशी* *छोटी दीवाली*🪔
*दिनांक 3 नवंबर 2021 बुधवार*
*शुभ पूजन मुहूर्त*
सुबह-6:34 से 9:22 बजे तक
सुबह-10:46 से 12:10 बजे तक
शाम- 4:22 से 5:46 बजे तक
शाम- 7:22 से 10:35 बजे तक
*कुंभ लग्न*- दोपहर 1:41 से 3:14 बजे तक
*वृषभ लग्न*- शाम 6:30 बजे से 8:29 तक
*🪔दीपावली*🪔
*दिनांक 4 नवंबर 2021 गुरुवार*
*शुभ पूजन मुहूर्त*
सुबह 6:35 से 7:59 तक
दोपहर 12:10 से 2:58 तक
शाम 4:22 से 7:22 तक
रात 12:11 से 1:47 तक
*अभिजीत मुहूर्त*- दोपहर 11:48 से 12:33 बजे तक
*कुंभ लग्न* -दोपहर 1:37 से 3:10 बजे तक
*वृषभ लग्न*- शाम 6:26 से 8:25 बजे तक
*सिंह लग्न*- रात 12:54से 3:05 तक
*होरा मुहूर्त*
*शुक्र बुध* -सुबह 9:23 से 11:14 बजे तक
*चंद्रमा*- दोपहर 11:14 से 12:10 बजे तक
*गुरु*- दोपहर 1:06 से 2:02 बजे तक
तंत्र साधना करने वाले साधकों के लिए एवं मां भगवती काली की उपासना करने वालों के लिए महानिशा काल पूजन ,रात 11:38 बजे से 12:30 बजे तक रहेगा ।
शाम 5:43 बजे से 8:18 बजे तक शास्त्र प्रमाणित प्रदोष काल में श्री महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त है ।
*।।प्रदोषे दीपदानम लक्ष्मीपूजनादि विहितम।।धर्मसिन्धु*
*जो लोग दीपावली का व्रत करते हैं वह प्रदोष काल में पूजन करके अन्न ग्रहण कर सकते हैं*
*🪔धोक पड़वा गोवर्धन पूजन*🪔
दिनांक 5 नवंबर 2021 शुक्रवार
*शुभ पूजन मुहूर्त*
सुबह- 7:59 से 10:45 बजे तक दोपहर-12:10 बजे से 1:34 बजे तक
रात-8:58 बजे से 10:34 बजे तक
*अभिजीत मुहूर्त*-
सुबह 11:48 बजे से 12:33 बजे तक
*होरा मुहूर्त*
*शुक्र बुद्ध चंद्रमा*- सुबह 6:35 बजे से 9:23 बजे तक
*शुक्र बुध चंद्रमा*- शाम 7:54 बजे से 11:06 बजे तक
*🪔भाई दूज*🪔
दिनांक 6 नवंबर 2021 शनिवार
*शुभ पूजन मुहूर्त*
सुबह-7:59 बजे से 9:23 बजे तक
दोपहर-1:34 बजे से 4:21 बजे तक
शाम-5:45 बजे से 7:21 बजे तक
रात-8:58 बजे से 12:11 बजे तक
*अभिजीत मुहूर्त*- सुबह 11:48 बजे से 12:23 बजे तक
नोट *यह सभी मुहूर्त उज्जैन पंचांग अनुसार है*
*💥दीपावली विशेष*💥
दीपोत्सव पर पूजन ,पाठ, जप सभी शास्त्र सम्मत विधि से करें। मंत्र साधना, तंत्र साधना एवं यंत्र साधना किसी योग्य साधक या गुरु के दिशा निर्देशन में ही करे। ये गुरु परंपरा से ही फलदाई होती है।अन्यथा ये हानि भी कर सकती हैं।व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी,और सोशल मीडिया पर चलने वाले मनगढ़ंत टोने-टोटके व अंधविश्वास से बचें।सोशल मीडिया पर आने वाले मंत्र प्रयोग मनमाने तरीके से ना करें। किसी ब्रह्मचारी, धर्मनिष्ठ,परंपरागत संत के दिशा निर्देशन में ही यह साधना की जा सकती है। अपने क्षेत्र के विद्वान आचार्य ब्राह्मणों द्वारा पूजन पाठ अवश्य कराएं। विष्णु सहस्त्रनाम,गोपाल सहस्त्रनाम,कनकधारा स्तोत्र,इंद्र कृत लक्ष्मीअष्टक,दरिद्र दहन शिव स्तोत्र,गणपति अथर्वशीर्ष,श्री सूक्त,लक्ष्मी सूक्त का पाठ करवाएं। श्री गणेश,नवग्रह,दिकपाल,इंद्र,षोडश मातृका,व भगवान विष्णु लक्ष्मी कुबेर का पूजन करवाएं।
अपने इष्ट मंत्र,गुरु मंत्र,का अधिक से अधिक जाप करें।वैदिक एवं पौराणिक आधार पर योग्य ब्राह्मणों द्वारा पूजन करवाएं।
शास्त्रों में वर्णित है दीपक प्रज्वलित करके कभी भी सीधे धरती पर नहीं रखते हैं दीपक का पूजन कर कर दीपक को अक्षत (चावल)या सप्तधान्य पर ही आसन देते हैं।जहां-जहां दीपक रखे। वहां थोड़े-थोड़े से अक्षत या सप्तधान्य जरूर रखें।
*धनतेरस* के दिन सांयकाल यमराज के निमित्त अपने घर के बाहर निम्न मंत्रों को बोलते हुए तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करे।
*मृत्युना पाषदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।*
*त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रियतामिति*।।
*रूप चतुर्दशी* को सुबह सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान करना चाहिए। जिस दिन अपामार्ग (आंधी झाड़ा) को पानी में डालकर स्नान करना चाहिये
भीगे वस्त्र से ही मृत्यु के पुत्र रूप काले और चितकबरे में रंग के दो श्वान के निमित्त दीपदान करना चाहिए। यह दोनों श्वान यमराज के सेवक तथा परस्पर भाई है।
इसके बाद पुनः स्नान करना चाहिए। फिर यम को उनके 14 नामों का उच्चारण करते हुए तर्पण करना चाहिए।
दीप उत्सव में जितना महत्व देवताओं के दीपदान का है,उतना ही महत्व पितरों के दीपदान का भी है। इसलिए अपने पितरों के निमित्त भी दीपदान अवश्य करें।
दीपदान के लिए मूंगफली का तेल, तिल का तेल, गाय के घी के दीपक सर्वोत्तम है।साथ ही साथ कार्तिक के पुण्य पवित्र महीने में गौ सेवा विशेष पुण्यदाई होती है। दीपोत्सव वैदिक एवं पौराणिक एवं अपनी कुल परंपरा के अनुसार ही मनाए किसी भी तरह के अंधविश्वास टोनेटोटके में न फंसे ।तंत्र शास्त्र बहुत ही पवित्र एवं आत्मउन्नति का माध्यम है। किसी भी भ्रम से भ्रमित ना हो,सिर्फ अपनी गुरु परंपरा का ही अनुसरण करें।
2 गज दूरी मास्क है जरूरी।स्वस्थ रहें एवं सुरक्षित रहें
*💥🪔पंच दिवसीय दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं*🪔💥
*पंडित कपिल शर्मा (काशी)*