*इंदौर के साथ 5 जिले, 38 तहसील और 2781 गांव से होगा विकसित मध्य प्रदेश का सूर्योदय*
*इंदौर का हाथ पकड़ विकसित भारत में प्रवेश करेंगे मालवा के सवा करोड़ लोग*
*इंदौर के विकास का बैक्टीरिया 2781 गांव को डेवलप करेगा*
*इंदौर की संगत से होगा मालवा का विकास: 5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार*
*मालवा से होगा विकसित मध्य प्रदेश का सूर्योदय, सवा करोड लोगों की लाइफ चेंज हो जाएगी*
*एमपी के 6 जिले, 38 तहसील और 2781 गांव से होगा विकसित मध्य प्रदेश का सूर्योदय*
*विकसित भारत @2047 का रोडमैप: मध्य प्रदेश में 16,000 वर्ग किमी से होगी नए युग की शुरुआत*
*मालवा बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब: 5 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा*
*’60 मिनट एक्सेस’ कनेक्टिविटी विजन: 16000 वर्ग किलोमीटर में यहां से वहां सिर्फ 1 घंटे में*
*देश का पहला अनूठा लैंड पूलिंग मॉडल: विकास में भागीदार बनेंगे किसान, मिलेगी 60% विकसित जमीन*
*अपना मालवा अब डायरेक्ट दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ेगा: एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का बड़ा केंद्र बनेगा*
*ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट रणनीति: प्रकृति के साथ प्रगति ताकि क्लाइमेट चेंज भी लाइफ चेंज ना कर पाए*
*मल्टी-नोडल नेटवर्क विजन: तहसील और गांवों तक पहुँचेगा आधुनिक विकास*
*आध्यात्मिक और ऐतिहासिक सर्किट से होगा विकास, जीडीपी में 10% योगदान का लक्ष्य*
*डेटा-ड्रिवन प्रो-एक्टिव प्लानिंग: आबादी का दबाव बढ़ने से पहले ही तैयार होगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का बुनियादी ढांचा*
*इलेक्ट्रिक व्हीकल और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में मालवा क्षेत्र की बनेगी नई वैश्विक पहचान*
समाचार: -भोपाल, 20 जून 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के साथ UIMR मध्यप्रदेश की प्रगति का नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत विकास की अवधारणा को इंदौर जैसे बड़े शहरों से जोड़कर आसपास के अंचल के छोटे कस्बों और तहसीलों तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया है। यही कारण है कि इस रीजन का दायरा 6 बार बढ़ाकर अब 16,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है। अब इंदौर के साथ उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जैसे 6 जिलों की 38 तहसीलें और 2,781 गांव तेजी से डेवलप होंगे। जहां सवा करोड लोग निवास करते हैं। यह रणनीतिक ढांचा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने में मध्यप्रदेश की अग्रणी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
*मध्यप्रदेश में 5 लाख नौकरियों के अवसर और नया औद्योगिक लैंड बैंक*
मालवा क्षेत्र को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के लिए यूआईएमआर के पास 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल लैंड बैंक और 14 नए प्रस्तावित औद्योगिक पार्क हैं। इस औद्योगिक क्रांति के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए 5 लाख नई नौकरियों के अवसर सृजित होने का अनुमान है। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और उन्नत इंजीनियरिंग के नए युग के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एक ‘एंकर सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, रतलाम को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रेड नोड बनाकर निर्यात हब के रूप में नई पहचान दी जाएगी।
*ग्रीनफील्ड कॉरिडोर:* मतलब 16000 वर्ग किलोमीटर की कनेक्टिविटी मात्र 1 घंटे में
इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार इसका अभूतपूर्व कनेक्टिविटी विजन है, जिसका लक्ष्य पूरे 16,000 वर्ग किमी क्षेत्र में ’60 मिनट की पहुँच’ सुनिश्चित करना है। इसके लिए इंदौर और उज्जैन के बीच एक ‘ग्रीनफील्ड कॉरिडोर’ और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। उज्जैन इंदौर मेट्रो विस्तार योजना के तहत पब्लिक ट्रांसपोर्ट को उन्नत बनाया जाएगा, ताकि नागरिक महज एक घंटे के भीतर मुख्य आर्थिक केंद्रों तक पहुँच सकें। यह रीजन सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) और एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे यहाँ के कारखानों में बना सामान कुछ ही घंटों में प्रमुख बंदरगाहों तक पहुँच सकेगा।
*मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन रीजन लैंड पूलिंग मॉडल और किसानों की भागीदारी*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की नींव रखकर विकास के एक नए युग की शुरुआत की है। यह देश का ऐसा पहला लैंड पूलिंग मॉडल है, जहाँ 17 गाँवों के किसानों को उनकी 60% विकसित जमीन वापस दी जाएगी, जिससे किसान केवल जमीन देने वाले नहीं बल्कि सीधे तौर पर विकास का लाभ उठाने वाले बनेंगे। इस ‘मल्टी-नोडल नेटवर्क’ रणनीति के तहत देवास, धार, मक्सी और शाजापुर जैसे शहरों को भी ग्रोथ नोड्स के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि इंदौर जैसे बड़े शहरों पर आबादी और संसाधनों का दबाव कम हो सके।
*मेट्रो विस्तार योजना और ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी*
विकास की इस दौड़ में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए ‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट’ पॉलिसी लागू की गई है। यहां ब्लू का मतलब है जल क्षेत्र और ग्रीन का मतलब है वन क्षेत्र। इसके तहत नर्मदा नदी सहित अन्य जल निकायों (ब्लू) और वन क्षेत्रों (ग्रीन) के पास निर्माण पर कड़ा प्रतिबंध रहेगा और हरियाली बढ़ाने के लिए व्यापक प्लांटेशन को अनिवार्य बनाया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्रणाली अपनाई जाएगी ताकि नदियों में प्रदूषित पानी न जाए।भविष्य के ये औद्योगिक क्लस्टर ‘कार्बन न्यूट्रल’ होंगे और अपनी बिजली की जरूरतों के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों से करेंगे।
*मालवा क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन और 10 फीसदी जीडीपी का लक्ष्य*
‘विकास भी, विरासत भी’ के अद्भुत संगम पर आधारित है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में योगदान 10% तक पहुँचे। अकेले उज्जैन में 2023 में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुँचे, जिसे देखते हुए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को एक लक्जरी टूरिज्म सर्किट के रूप में जोड़ा जा रहा है। इसमें रूरल टूरिज्म, नर्मदा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और हेरिटेज होटल्स का एक बड़ा नेटवर्क शामिल होगा, जो स्थानीय स्तर पर आय के असीमित स्रोत खोलेगा।
*डेटा ड्रिवन प्लानिंग और मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र विकास अधिनियम 2025*
शहरी नियोजन की बाधाओं को खत्म करने के लिए सरकार ‘मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम, 2025’ लेकर आई है। अब शहरों का विस्तार पारंपरिक सोच के बजाय वैज्ञानिक डेटा और जियोस्पेशियल टूल्स के आधार पर होगा। एक सशक्त ‘मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी’ का गठन किया जाएगा, जिसके पास पूरे क्षेत्र के लिए योजना बनाने और उसे लागू करने का सर्वोच्च वैधानिक अधिकार होगा। यह अथॉरिटी अगले 20 से 50 वर्षों की संभावित आबादी और ट्रैफिक की जरूरत का आकलन कर बुनियादी ढांचा पहले ही तैयार कर लेगी (प्रो-एक्टिव प्लानिंग), जिससे भविष्य की पीढ़ियों को अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।